Impact of Venus in the Second House - Lal Kitab 1941 - Astrologer Vijay Goel
लाल किताब 1941 की विवेचन शृंखला का ये मेरा अड़तीसवा वीडियो है। इसमे मैंने “शुक्र खाना नंबर 2” (जब कुंडली के दुसरे घर मे शुक्र स्थित हो के बारे मे विश्लेषण करने का प्रयास किया है। कुंडली के दूसरे घर को भारतीय वैदिक ज्योतिष में धन स्थान कहा जाता है, परंतु लाल किताब कुण्डली में इसे धर्म भाव कहा जाता है। दूसरे घर का कारक ग्रह गुरु है। कुंडली का दूसरा घर व्यक्ति के बचपन के समय परिवार में हुई उसकी परवरिश तथा उसकी मूलभूत शिक्षा के बारे में भी बताता है। कुंडली का दूसरा घर व्यक्ति के वैवाहिक जीवन के बारे में भी बताता है तथा इस घर से विशेष रूप से वैवाहिक जीवन की पारिवारिक सफलता या असफलता तथा कुटुम्ब के साथ रिश्तों तथा निर्वाह का पता चलता है। कुंडली का दूसरा घर धारक की वाणी तथा उसके बातचीत करने के कौशल के बारे में भी बताता है। दूसरे घर से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, परिवार का सुख, घर की स्थिति, दाईं आँख, वाणी, जीभ, खाना-पीना, प्रारंभिक शिक्षा, संपत्ति आदि के बारे में जाना जाता है। द्वितीय भाव में शुक्र (Venus in Second House) जातक को धनवान, मीठा अधिक पसन्द करने वाला, समाज में यश व सम्मान पाने वाला, सुखी, रत्नों से आर्थिक लाभ लेने वाला, कुटुम्ब युक्त, साहसी, कविता करने वाला तथा अत्यधिक मधुर बोलने वाला, सुन्दर नेत्र युक्त व कर्त्तव्य परायण बनाता है। ऐसे जातक को सोने और आभूषणों से संबंधित व्यवसाय या व्यापार अत्यंत हानिकारक होता है। और मिट्टी के सामान से जुडा व्यवसाय, कृषि और पशु बेहद फायदेमंद साबित होंता है। दूसरे भाव में शुक्र होने के कारण जातक का मुखमंडल शोभायमान होता है। जातक विद्वान, यशस्वी, गुरुभक्त, बन्धुमान्य, राजाओं द्वारा पूजित और कृतज्ञ व्यक्ति होंता है। सौंदर्य सम्पन्न लोगों और वस्तुओं से जातक का रिश्ता जु










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